नई दिल्ली: अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी के बीच ईरान ने तेल निर्यात के लिए एक नया और अप्रत्याशित रास्ता चुन लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान अब समुद्री मार्ग के बजाय रेलवे नेटवर्क के जरिए चीन और पाकिस्तान तक कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई कर रहा है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है।
50 दिनों की नाकेबंदी के बावजूद जारी रहा निर्यात
अमेरिका ने 13 अप्रैल, 2026 को ईरान के खिलाफ सख्त समुद्री नाकेबंदी लागू की थी, जिसका उद्देश्य उसके तेल निर्यात को पूरी तरह रोकना था। लेकिन करीब 50 दिन बीतने के बाद भी ईरान का तेल निर्यात पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन जाने वाली मालगाड़ियों की संख्या में तीन गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रात के अंधेरे में चल रही तेल से भरी ट्रेनें
रिपोर्टों के मुताबिक, मध्य एशिया के रास्ते रात के समय तेल टैंकरों से लदी लंबी मालगाड़ियां लगातार चीन की ओर रवाना हो रही हैं। यह पूरी आपूर्ति व्यवस्था अब समुद्री मार्ग की जगह रेल नेटवर्क पर आधारित होती दिख रही है, जिससे वैश्विक प्रतिबंधों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
चीन-ईरान रेलवे कॉरिडोर बना अहम कड़ी
इस वैकल्पिक सप्लाई चेन में 10,400 किलोमीटर लंबा ‘चीन-ईरान रेलवे कॉरिडोर’ अहम भूमिका निभा रहा है। यह रेल मार्ग चीन के शियान शहर से शुरू होकर कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान होते हुए ईरान की राजधानी तेहरान तक पहुंचता है। मई 2025 में शुरू हुई इस परियोजना ने ईरान को नया व्यापारिक विकल्प दिया है।
रेल नेटवर्क से तेज सप्लाई, लेकिन क्षमता सीमित
जहां समुद्री रास्ते से तेल पहुंचने में लगभग एक महीने का समय लगता है, वहीं रेल मार्ग से यह दूरी करीब 15 दिनों में तय हो रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे समुद्री मार्ग का पूर्ण विकल्प नहीं बन सकता, क्योंकि इसकी क्षमता काफी सीमित है।
रेल और समुद्री परिवहन में बड़ा अंतर
विशेषज्ञों के अनुसार, एक मालगाड़ी लगभग 60,000 से 70,000 बैरल तेल ले जा सकती है, जबकि एक सामान्य तेल टैंकर 6 लाख बैरल और बड़े क्रूड कैरियर 20 लाख बैरल से अधिक तेल ढो सकते हैं। यही कारण है कि रेल मार्ग सीमित मात्रा में ही निर्यात संभाल पा रहा है।
ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए राहत, लेकिन सीमित लाभ
अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद यह रेल मार्ग ईरान के लिए आर्थिक जीवनरेखा साबित हो रहा है। अनुमान के अनुसार, एक ट्रेन खेप से ईरान को लाखों डॉलर की आय हो रही है, लेकिन यह राशि समुद्री व्यापार से होने वाली अरबों डॉलर की कमाई की तुलना में काफी कम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था ईरान के लिए अस्थायी राहत जरूर है, लेकिन लंबे समय में समुद्री व्यापार का कोई वास्तविक विकल्प नहीं बन सकती।
